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Saturday, 26 December 2015

तर्ज : दिल में हो तुम साँसों में तुम...

सपनों में तू अपनों में तू देखु जिधर तू ही तू...
सांसो में तू धड़कन में तू रग रग में तू है समाया...

फेरता नजरें जिधर तू ही तू आये नज़र,,,
छोड़ तुझको "" सांवरे "" बोल जाउँ मैं तो किधर,,,
फूलों में तू कलियों में तू चारों तरफ तेरी माया...
सपनों में तू अपनों में तू देखु जिधर तू ही तू...

चाहे धरती हो आसमां सबमें तेरा वास है,,,
सबका हारे का सहारा है तू मेरा ये विश्वास है,,,
तू ही मेरा मैं हूँ तेरा सबमें ही तेरी ही छाया...
सपनों में तू अपनों में तू देखु जिधर तू ही तू...

"" श्याम "" कहे जब गाऊँ मैं बांसुरी बजाता है तू,,,
प्यारी धुन पे तेरी सबको नचाता है तू,,,
देखा मैंने सारा जहाँ इस दिल को बस तू ही भाया...
सपनों में तू अपनों में तू देखु जिधर तू ही तू...

सपनों में तू अपनों में तू देखु जिधर तू ही तू...
सांसो में तू धड़कन में तू रग रग में तू है समाया...

Tuesday, 27 October 2015

तर्ज-जब रसना हरिगुण गाए,

तर्ज-जब रसना हरिगुण गाए, मन प्रभु चरनन रमजाए
तब इतना समझ लेना, अब हरि से मिलन होगा।
यह नक्की है प्यारे, तेरा जनम सफल होगा ।।।
फिर बरसाने भी जाए, जा चौखट शीश नबाए।
छवि देख हृदय हरषाए,राधे पर बलि बलि जाऐ।
होली छवि मन में लाए,मन मन ही रंग बरसाए।
मन में ही लाठी खाए,इस सुख को आँख बताए।।
गहबरवन जा चिल्लाए,तुम बिन जग रास न आए
तब इतना समझ लेना, अब * * * * * * *
यह नक्की है प्यारे, तेरा * * *

तर्ज - राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।

तर्ज - राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।।
पर प्रारब्ध चले मम आगे, यह चाहे यम, कहे अभागे।
यह तो तभी कटे रघुराई, जब तुम लो, चरनन लिपटाई।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम,सियाराम जय जय राम।।
अब मुझको नहीं, धन सुख इच्छा, मतलो अब मम अधिक परीक्षा।
अबतो मम मनुआं यह चाहे,तुमको रोए, तुमको गाए।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम,सियाराम जय जय राम।।
सो दे दो वह प्रेमाभक्ति, जिसमें ही है, बस वह शक्ति।
जो प्रारब्धों से भिड जाए,काट उन्हें,तुम तक पहुँचाए।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम,सियाराम जय जय राम।।
अंतिम कृपा करो रघुनंदन, काट फेंकिए घर के बंधन।
जिससे तुम गोदी सो जाऊँ,तुममें ही, बस लय हो जाऊँ।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम,सियाराम जय जय राम।।