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Saturday, 20 February 2016

जय जय हरि-हृदया वृषभानु-सुकुमारी॥

जय जय हरि-हृदया वृषभानु-सुकुमारी॥
बिजुरि बरन गौर बदन, सोहत तन नील बसन,
बिंब अधर मधुर हँसन, माधव-मन-हारी।
सुषमामय अंग-‌अंग, लि‌एँ मधुर सखिन संग,
बिहरत भरि मन उमंग प्रियतम-सुखकारी॥

लोक-बेद-लाज त्यागि, त्यागि स्वजन महाभाग,
हरि-हित गावत बिहाग, डोलत मतवारी।
प्रियतम-सुख-जल-सुमीन, निज-सुख-बांछा बिहीन,
गुननिधि, पै बनी दीन, राधिका दुलारी॥

जय जय श्री राधे! जय जय श्री राधे! जय जय श्री राधे!

"पद रत्नाकर "

श्रद्धेय भाई जी श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी
गीताप्रेस गोरखपुर भारत पुस्तक कोड-५०

Tuesday, 29 December 2015

जय बजरंगी ||•~•*•~•*• •*•~•*•~•|| जय हनुमान

जय बजरंगी ||•~•*•~•*• •*•~•*•~•|| जय हनुमान

आज मंगलवार है महावीर का वार है यह सच्चा दरबार है |
सच्चे मन से जो कोई ध्यावे उसका बेडा पार है ||

चैत्र सुदी पूनम मंगल को जन्म वीर ने पाया है |
लाल लंगोटा गदा हाथ में सर पर मुकट सजाया है ||
शंकर का अवतार है...महावीर का वार है...

ब्रह्मा जी से ब्रह्म ज्ञान का बल भी तुमने पाया है ।
राम काज शिवशंकर ने वानर का रूप धराया है ।।
लीला अपरम्पार है...महावीर का वार है...

बालपन में महावीर ने हरदम ध्यान लगाया है |
श्राप दिया ऋषियों ने तुमको बल का ध्यान भुलाया है ||
राम नाम आधार है...महावीर का वार है...

राम जन्म जब हुआ अयोध्या में कैसा नाच नचाया है |
कहा राम ने लक्ष्मण से यह वानर मन को भाया है ||
राम लक्ष्मण से प्यार है...महावीर का वार है...

पंचवटी से सीता को रावण जब लेकर आया है |
लंका में जाकर तुमने माता का पता लगाया है ||
अक्षय को दिया मार है...महावीर का वार है...

मेघनाद ने ब्रह्म पाश तुमको आन फंसाया है |
ब्रह्पाश में फँस करके ब्रह्मा का मान बढाया है ||
बजरंगी की बाँकी मार है...महावीर का वार है...

लंका जलाई आपने रावण भी घबराया है |
श्री राम लखन को आन करके सीता सन्देश सुनाया है ||
सीता शोक अपार है...महावीर का वार है...

शक्ति बाण लग्यो लक्ष्मण के बूटी लेने धाये हैं |
लाकर बूटी लक्ष्मण जी के प्राण बचाये हैं ||
राम लखन का प्यार है...महावीर का वार है...

राम चरण में महावीर ने हरदम ध्यान लगाया है |
राम तिलक में महावीर ने सीना फाड़ दिखाया है ||
सीने में राम दरबार है...महावीर का वार है...

आज मंगलवार है महावीर का वार है यह सच्चा दरबार है |
सच्चे मन से जो कोई ध्यावे उसका बेडा पार है ||

Tuesday, 27 October 2015

तर्ज - राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।

तर्ज - राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।।
पर प्रारब्ध चले मम आगे, यह चाहे यम, कहे अभागे।
यह तो तभी कटे रघुराई, जब तुम लो, चरनन लिपटाई।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम,सियाराम जय जय राम।।
अब मुझको नहीं, धन सुख इच्छा, मतलो अब मम अधिक परीक्षा।
अबतो मम मनुआं यह चाहे,तुमको रोए, तुमको गाए।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम,सियाराम जय जय राम।।
सो दे दो वह प्रेमाभक्ति, जिसमें ही है, बस वह शक्ति।
जो प्रारब्धों से भिड जाए,काट उन्हें,तुम तक पहुँचाए।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम,सियाराम जय जय राम।।
अंतिम कृपा करो रघुनंदन, काट फेंकिए घर के बंधन।
जिससे तुम गोदी सो जाऊँ,तुममें ही, बस लय हो जाऊँ।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम,सियाराम जय जय राम।।