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Monday, 13 February 2017

राम" "राम" "राम" "राम"


श्री राम, श्री राम, श्री राम कहिये
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये,
हो रामा, जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये!

१) मुख मे हो राम नाम, राम सेवा हाथ मे
तू अकेला नहीं प्यारे राम तेरे साथ मे, राम तेरे साथ मे
विधि का विधान मान हानि लाभ सहिये, हानि लाभ सहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये,
हो रामा, जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये!

२) किया अभिमान तो फिर मान नहीं पायेगा
होगा प्यारे वही जो श्री राम जी को भाएगा, राम जी को भाएगा,
फल की आशा त्याग, शुभ कर्म करते रहिये, शुभ कर्म करते रहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये,
हो रामा, जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये!

३) ज़िंदगी की डोर सौप हाथ दीना नाथ के,
महलो मे राखे चाहे झोपड़ी मे वास दे, झोपड़ी मे वास दे,
धन्यवाद निर्विवाद राम राम कहिये, राम राम कहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये,
हो रामा, जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये!

४) आशा एक राम जी की दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक राम जी से दूजा नाता तोड़ दे, दूजा नाता तोड़ दे,
साधु संग राम रंग अंग अंग रंगिये, अंग अंग रंगिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये,
हो रामा, जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये!

जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये,
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये,

श्री राम, श्री राम, श्री राम कहिये
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये

"राम" "राम" "राम" "राम"

Saturday, 20 August 2016

राम नाम के हीरे मोती

राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊं गली गली ।
ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥
दोलत के दीवानों सुन लो एक दिन ऐसा आएगा,
धन योवन और रूप खजाना येही धरा रह जाएगा ।
सुन्दर काया माटी होगी, चर्चा होगी गली गली,
ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥
प्यारे मित्र सगे सम्बंधी इक दिन तुझे भुलायेंगे,
कल तक अपना जो कहते अग्नि पर तुझे सुलायेंगे ।
जगत सराय दो दिन की है, आखिर होगी चला चली,
ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥
क्यूँ करता है तेरी मेरी, छोड़ दे अभिमान को,
झूठे धंदे छोड़ दे बन्दे जप ले हरी के नाम को ।
दो दिन का यह चमन खिला है, फिर मुरझाये कलि कलि,
ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥
जिस जिस ने यह हीरे लुटे, वो तो मला माला हुए,
दुनिया के जो बने पुजारी, आखिर वो कंगाल हुए ।
धन दौलत और माया वालो, मैं समझाऊं गली गली,
ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली ॥

~~~~●◆■★|| राम राम ||★■◆●~~~~
~~~●◆■★|| जय बजरंगी ||★■◆●~~~
~~~●◆■★|| जय हनुमान ||★■◆●~~~

Friday, 25 March 2016

राम राम राम भजो, राम भजो

राम राम राम भजो, राम भजो, भा‌ई।
राम-भजन-हीन जनम सदा दुखदा‌ई॥
अति दुरलभ मनुज-देह सहजहीमें पा‌ई।
मूरख रह्यो राम भूल बिषयन मन ला‌ई॥
बालकपन दुख अनेक भोगत ही बिता‌ई।
स्त्री-सुत-धनकी अपार चिंता तरुना‌ई॥
रात-दिवस पसु की ज्यों इत-‌उत रह्यो धा‌ई।
तृसना की बेलि बढ़ी पाप-बारि पा‌ई॥
बात-पित्त-कफहु बढ्यो, दुखद जरा आ‌ई।
इंद्रिन की शक्ति घटी, सिर धुनि पछिता‌ई॥
इतनेहि में कठिन काल घेरि लियो आ‌ई।
मृत्यु निकट देखि-देखि अति ही भय पा‌ई॥
सोच करत मन-ही-मन अतिसै पछिता‌ई।
हाय मैं न भज्यो राम, कहा कर्‌यो मा‌ई॥
मृत्यु प्रान-हरन करत कुटुंब तें छुड़ा‌ई।
महादुःख रह्यो छाय, बिफल सब उपा‌ई॥
पापन के फल-स्वरूप बुरी जोनि पा‌ई।
दुःख-भोग करत पुनि नरकन महँ जा‌ई॥
बार-बार जनम-मृत्यु, याधि अरु बुढ़ा‌ई।
झेलत अति कठिन कष्ट, शांति नाँहि पा‌ई॥
यहि विधि भव-दुख अपार बरने नहिं जा‌ई।
भव-भेषज राम-नाम, श्रुति-पुरान गा‌ई॥
राम-नाम जपत त्रिबिध ताप जग-नसा‌ई।
राम-नाम मँगल-करन सब बिधि सुखदा‌ई॥
प्रेम-मगन मन तें सकल कामना बिहा‌ई।
जो‌इ जपत राम-नाम सो‌इ मुकति पा‌ई॥

पदरत्नाकर

नारायण । नारायण ।

Friday, 18 March 2016

राम तें बड़ नाम

साधन नाम-सम नहिं आन। 
जपत सिव-सनकादि, सारद-नारदादि सुजान॥ 
नाम के बल मिटत भीषन असुभ भाग्य-बिधान। 
नाम-बल मानव लहत सुख सहज मन-‌अनुमान॥ 
नाम टेरत टरत दारुन बिपति, सोक महान। 
आर्त करि, नर-नारि, ध्रुव सब रहे सुचि सहिदान॥ 
नाम के परताप तें जल पर तरे पाषान। 
नाम-बल सागर उलाँघ्यो सहज ही हनुमान॥ 
नाम-बल संभव सकल जे कछु असंभव जान। 
धन्य ते नर, रहत जिनके नाम-रट की बान॥ 
पाप-पुंज प्रजारिबे-हित प्रबल पावक-खान। 
होत छिन महँ छार, निकसत नाम जान-‌अजान॥ 
नाम-सुरसरि में निरंतर करत जे जन न्हान। 
मिटत तीनों ताप मुख नहिं होत कबहुँ मलान॥ 
नाम-‌आश्रित जनन के मन बसत नित भगवान। 
जरत खरत कु-वासना सब तुरत लज्जा-मान॥ 
नाम जीवन, नाम अमरित, नाम सुख को थान। 
नाम-रत जे नाम-पर ते पुरुष अति मतिमान॥ 
नाम नित आनंद-निरझर, अति पुनीत पुरान। 
मुक्त सत्वर होत जे जन करत सादर पान॥ 
नाम जपत सुसिद्ध जोगी बनत समरथवान। 
नाम तें उपजत सु-भगति, बिराग सुभ बलवान॥ 
नाम के परताप दीखत प्रकृति-दीप बुझान। 
नाम-बल ऊगत प्रभामय भानु तव-ज्ञान॥ 
नाम की महिमा अमित, को सकै करि गुन-गान। 
राम तें बड़ नाम, जेहि बल बिकत श्रीभगवान॥ 

पदरत्नाकर 

Wednesday, 18 November 2015

राम राम कहिये राम राम कहिये...

राम राम कहिये राम राम कहिये...
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये...

मुख में हो राम नाम~राम सेवा हाथ में...
तू अकेला नाहिं प्यारे~राम तेरे साथ में...
विधि का विधान~जान हानि लाभ सहिये...

किया अभिमान तो फिर मान नहीं पायेगा...
होगा प्यारे वही जो श्री रामजी को भायेगा...
फल आशा त्याग शुभ कर्म करते रहिये...

ज़िन्दगी की डोर सौंप हाथ दीनानाथ के...
महलों मे राखे चाहे झोंपड़ी मे वास दे...
धन्यवाद निर्विवाद राम राम कहिये...

आशा एक रामजी से~दूजी आशा छोड़ दे...
नाता एक रामजी से~दूजे नाते तोड़ दे...
साधु संग~राम रंग~अंग अंग रंगिये...
काम रस त्याग~प्यारे राम रस पगिये...
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये...

Monday, 16 November 2015

राम - राम जप , राम जप , राम - राम जप राम।

राम - राम जप , राम जप , राम - राम जप राम।
क्योंकि यही वह मंत्र है , जो मुक्ति दे " रोटीराम "।।
हल्के में मत ले इसे , और न एक पल भूल।
यही एक दिन दे तुझे , कर हरि के अनुकूल।।

काम - क्रोध नहीं मिट सके , लोभ , न सका पछाड।
राग - द्वेष का जोर है , घर आसक्ति पहाड।।
तो लिख कर पल्लू बाँध ले , कि पाएगा पशुचाम।
पुनर्जन्म में , तन नहीं , नर का " रोटीराम "।।

मन मक्खी मानिन्द है , मन को मैला भाय।
मोटा सोटा मारकर , मन को रखो दबाय।।
मन को गर सम्मान दे , मानी मन की बात।
तो एक दिन " रोटीराम " ये , पडबा दे यमलात।।

Tuesday, 27 October 2015

तर्ज - राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।

तर्ज - राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।।
पर प्रारब्ध चले मम आगे, यह चाहे यम, कहे अभागे।
यह तो तभी कटे रघुराई, जब तुम लो, चरनन लिपटाई।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम,सियाराम जय जय राम।।
अब मुझको नहीं, धन सुख इच्छा, मतलो अब मम अधिक परीक्षा।
अबतो मम मनुआं यह चाहे,तुमको रोए, तुमको गाए।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम,सियाराम जय जय राम।।
सो दे दो वह प्रेमाभक्ति, जिसमें ही है, बस वह शक्ति।
जो प्रारब्धों से भिड जाए,काट उन्हें,तुम तक पहुँचाए।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम,सियाराम जय जय राम।।
अंतिम कृपा करो रघुनंदन, काट फेंकिए घर के बंधन।
जिससे तुम गोदी सो जाऊँ,तुममें ही, बस लय हो जाऊँ।।
राम सियाराम, सियाराम जय जय राम।
राम सियाराम,सियाराम जय जय राम।।