Sunday, 2 April 2017

जय वसुदेव-देवकीनन्दन, जयति यशोदा-नंदनन्दन



।। श्री हरि ।।
जय वसुदेव-देवकीनन्दन, जयति यशोदा-नंदनन्दन।
जयति असुर-दल-कंदन, जय-जय प्रेमीजन-मानस-चन्दन॥
बाँकी भौंहें, तिरछी चितवन, नलिन-विलोचन रसवर्षी।
बदन मनोहर मदन-दर्प-हर परमहंस-मुनि-मन-कर्षी॥
अरुण अधर धर मुरलि, मधुर मुसकान मजु मृदु सुधिहारी।
भाल तिलक, घुँघराली अलकैं, अलिकुल-मद-मर्दनकारी॥
गुंजाहार, सुशोभित कौस्तुभ, सुरभित सुमनोंकी माला।
रूप-सुधा-मद पी-पी सब समोहित ब्रजजन-ब्रजबाला॥
जय वसुदेव-देवकीनंदन, जयति यशोदा-नँदनन्दन।
जयति असुर-दल कंदन, जय जय प्रेमीजन मानस-चन्दन॥
पद-रत्नाकर / श्री हनुमानप्रसादजी पोद्दार

कर प्रणाम तेरे चरणोंमें लगता हूँ अब तेरे काज



कर प्रणाम तेरे चरणोंमें लगता हूँ अब तेरे काज ।
पालन करनेको आज्ञा तव मैं नियुक्त होता हूँ आज॥
अन्तरमें स्थित रहकर मेरे बागडोर पकड़े रहना ।
निपट निरंकुश चंचल मनको सावधान करते रहना॥
अन्तर्यामीको अन्त:स्थित देख सशङिक्त होवे मन।
पाप-वासना उठते ही हो नाश लाजसे वह जल-भुन॥
जीवोंका कलरव जो दिनभर सुननेमें मेरे आवे ।
तेरा ही गुणगान जान मन प्रमुदित हो अति सुख पावे॥
तू ही है सर्वत्र व्याप्त हरि! तुझमें यह सारा संसार ।
इसी भावनासे अन्तरभर मिलूँ सभीसे तुझे निहार ॥
प्रतिपल निज इन्द्रियसमूहसे जो कुछ भी आचार करुँ।
केवल तुझे रिझाने को, बस तेरा ही व्यवहार करुँ ॥
-श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार (भाईजी)
रह पाएगा क्या रस का चसका, नहिं कृष्ण से प्रेम लगाएगा जो l
अरे कृष्ण उसे समझेंगे, वही रसिकों के समाज में जाएगा जो l l
ब्रज धुल धपेट कलेवर में ,गुण नित्य किशोर के गाएगा जो l
हँसता हुआ श्याम मिलेगा उसे, निज प्राणों की बाजी लगाए गा जो l l

जब से देखा तुझे, जाने क्या हो गया...




जब से देखा तुझे, जाने क्या हो गया...
हे वृंदावन के श्री राधारमण, मैं तेरा हो गया...

तू दाता है, तेरा पुजारी हूँ मैं...
तेरे दर का लाल जी भिखारी हूँ मैं...
तेरे चौखट पे दिल ये मेरा खो गया..
हे वृंदावन के श्री राधारमण, मैं तेरा हो गया...

जब से मुझको, तेरी मोहन भक्ति मिली...
मेरे मुरझाये मन में, ये कालिया खिली..
जो सोचा कभी, था वही हो गया..
हे वृंदावन के श्री राधारमण, मैं तेरा हो गया...

तेरे दरबार की वाह, अजब शान है...
जो भी देखे वो ही, तुझेपे कुर्बान है...
तेरी प्रीति का मुझको नशा हो गया...
हे वृंदावन के श्री राधारमण, मैं तेरा हो गया...

लाल जी! जब तेरी झांकी का, दर्शन किया...
तेरे चरणों में तन-मन, यह अर्पण किया...
एक दफा वृंदावन धाम, में जो भी गया.,.
हे वृंदावन के श्री राधारमण, वो तेरा हो गया...

जब से देखा तुझे, जाने क्या हो गया...
हे वृंदावन के श्री राधारमण, मैं तेरा हो गया...