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Sunday, 2 April 2017

जब से देखा तुझे, जाने क्या हो गया...




जब से देखा तुझे, जाने क्या हो गया...
हे वृंदावन के श्री राधारमण, मैं तेरा हो गया...

तू दाता है, तेरा पुजारी हूँ मैं...
तेरे दर का लाल जी भिखारी हूँ मैं...
तेरे चौखट पे दिल ये मेरा खो गया..
हे वृंदावन के श्री राधारमण, मैं तेरा हो गया...

जब से मुझको, तेरी मोहन भक्ति मिली...
मेरे मुरझाये मन में, ये कालिया खिली..
जो सोचा कभी, था वही हो गया..
हे वृंदावन के श्री राधारमण, मैं तेरा हो गया...

तेरे दरबार की वाह, अजब शान है...
जो भी देखे वो ही, तुझेपे कुर्बान है...
तेरी प्रीति का मुझको नशा हो गया...
हे वृंदावन के श्री राधारमण, मैं तेरा हो गया...

लाल जी! जब तेरी झांकी का, दर्शन किया...
तेरे चरणों में तन-मन, यह अर्पण किया...
एक दफा वृंदावन धाम, में जो भी गया.,.
हे वृंदावन के श्री राधारमण, वो तेरा हो गया...

जब से देखा तुझे, जाने क्या हो गया...
हे वृंदावन के श्री राधारमण, मैं तेरा हो गया...