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Monday, 1 February 2016

प्रभु मन बसियो रे...

वीर हनुमाना अति बलवाना...राम नाम रसियों रे
प्रभु मन बसियो रे...

जो कोई आवे अरज लगावे...सब की सुनियो रे
प्रभु मन बसियो रे...

बजरंग बाला फेरु थारी माला दीनदयाला...संकट हरियो रे
प्रभु मन बसियो रे...

ना कोई संगी हाथ की तंगी...जल्दी हरियो रे
प्रभु मन बसियो रे...

अर्जी हमारी मर्जी तुम्हारी...कृपा करियो रे
प्रभु मन बसियो रे...

राम जी का प्यारा सिया का दुलारा...संकट हरियो रे
प्रभु मन बसियो रे...

वीर हनुमाना अति बलवाना...राम नाम रसियो रे
प्रभु मन बसियो रे...

|| राम राम ||
|| जय बजरंगी ||
|| जय हनुमान ||

Sunday, 10 January 2016

आते हो तुम बार-बार प्रभु !

आते हो तुम बार-बार प्रभु ! मेरे मन-मन्दिरके द्वार।
कहते-’खोलो द्वार, मुझे तुम ले लो अंदर करके प्यार’॥

मैं चुप रह जाता, न बोलता, नहीं खोलता हृदय-द्वार।
पुनः खटखटाकर दरवाजा करते बाहर मधुर पुकार॥

‘खोल जरा सा’ कहकर यों-’मैं, अभी काममें हूँ, सरकार।
‘फिर आना’-झटपट मैं घरके कर लेता हूँ बंद किंवार॥

फिर आते, फिर मैं लौटाता, चलता यही सदा व्यवहार।
पर करुणामय ! तुम न ऊबते,तिरस्कार सहते हर बार॥

दयासिन्धु ! मेरी यह दुर्मति हर लो,करो बड़ा उपकार।
नीच-‌अधम मैं अमृत छोड़, पीता हालाहल बारंबार॥

अपने सहज दयालु विरदवश, करो नाथ ! मेरा उद्धार।
प्रबल मोहधारामें बहते नर-पशुको लो तुरत उबार॥

'पद-रत्नाकर ' पुस्तक से, गीताप्रेस गोरखपुर
Right arrow with hook श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार भाईजी