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Saturday, 14 November 2015

केवल भगवत चरण ही , लगा सकेंगे पार।

केवल  भगवत  चरण  ही ,  लगा  सकेंगे  पार।
      औरों  से  मत  आस  रख , मतलब का संसार।।
       अब  भी  ज्यादा देर ना , हुई  है  " रोटीराम "।
        वक्त  के  रहते  चेत  जा , जप ले भगवन्नाम।।
 रहते , ममता - मोह अरु ,  लोभ  के " रोटीराम "।
      जापा भी , गर " नाम " तो,  कुछ नहीं आना काम।।
       क्योंकि ये तीनों मैल हैं , सो रहता , हृदय अशुद्ध।
        फिर कैसे?  निकले भला ,  हरिनाम  हो  शुद्ध।।
  कोस रहा , तकदीर को ,  क्यों ?  पी , पानी रोज।
      कांटे बो क्यों ?  चाहता , कि तुझको खिलें सरोज।।
       ऐसा हुआ ,  न हो सके ,  बिलकुल  " रोटीराम "।
        गुलशन महके , बस वहीं ,जो कर मरते सत्काम।।

Tuesday, 27 October 2015

कह कैसे ? कर पाएगा , यह भवसागर पार।

कह कैसे ? कर पाएगा , यह भवसागर पार।
जबकि मलिन है मन तेरा, शास्त्र विहित आचार।।
शास्त्र विहित व्यक्ति नहीं , कर पाता यह काम।
क्योंकि धर्म नहीं संग हो , उसके " रोटीराम "।।
और धर्म बिन जीव से , होते नहीं सत्कर्म।
नहीं अधर्मी व्यक्ति को , दुष्कर्मों में शर्म।।
कैसे ? फिर होगी तेरी , कह तो , नैय्या पार।
वंचित ही रह जाएगा , प्राप्ति पदारथ चार।।

सो बुद्धि से काम ले , छोड कमाना दाम।
देख बुढापा आ गया , जा जप अब हरिनाम।।
क्योंकि एक हरिनाम ही , जा पाता है संग।
देख मान जा, ले कमा , सही एक यही ढंग।।
दावा है यह शास्त्र का , सौ प्रतिशत हो पार।
मात्र " नाम " ही जीव का , कर पाए उद्धार।।
यमपुर में रोकड नहीं , भक्ति आती काम।।
होना है भवपार तो , कर ले " रोटीराम "।।