Thursday, 29 September 2016

तेरे भरोसे है नाथ

अब और ना तड़पाओ सांवरे…तेरे भरोसे है नाथ
अब और ना तड़पाओ सांवरे…दूर ना तुम जाओ
तेरे भरोसे है नाथ…

एक बार चले आओ सांवरे…यूँ न बिसराओ
तेरे भरोसे है नाथ…तेरे भरोसे है नाथ…

इस जीवन नैया को…भव पार करा दो नाथ…
विषयों के तूफाँ से…इसको बचालो नाथ…
कहीं दुब न जाये नाथ…थाम लो…आकर के पतवार…
तेरे भरोसे है नाथ…तेरे भरोसे है नाथ…

उस पार बैठे हो…क्यूँ भूल कर हमको…
हम भी तुम्हारे हैं…क्या भूल गये हमको…
कबसे तुम्हारी राह निहारे…बैठे हम इस पर…
तेरे भरोसे है नाथ…तेरे भरोसे है नाथ…

तुम्हे छोड़ के बोलो…जायें कहाँ हम नाथ…
दुःख~दर्द इस दिल के…किसको सुनायें नाथ…
अर्ज़ी हमारी तुमसे "" अनोखी ""…सुन भी लो सरकार…
तेरे भरोसे है नाथ…तेरे भरोसे है नाथ…

"" दिव्येश "" को और ना तड़पाओ सांवरे…तेरे भरोसे है नाथ…
अब और ना तड़पाओ सांवरे…"" दिव्येश "" से दूर ना तुम जाओ…
तेरे भरोसे है नाथ…

(तर्ज : नफरत की दुनिया को…)

जय श्री कृष्णा
राधे राधे

Tuesday, 27 September 2016

जनम जाय बीता, पढों क्यों न गीता।

जनम जाय बीता, पढों क्यों न गीता।
पढों क्यों न गीता, सुनो क्यों न गीता॥
ये हड्डियों का पिंजरा, कभी गिर पड़ेगा।
निकल जायेगा दम, तो फिर क्या करेगा॥
उठा ले चलेंगे, लगेगा पलीता।
पढों क्यों न गीता, सुनो क्यों न गीता॥
तुँ किस देश का है, कहाँ बस रहा है।
विषय वासनाओं में, क्यों फस रहा है॥
मानुष जन्म पाके, न राह जाये रीता।
पढों क्यों न गीता, सुनो क्यों न गीता॥
जनम जाय बीता, पढों क्यों न गीता।
पढों क्यों न गीता, सुनो क्यों न गीता॥
तू है अंश ईश्वर का, मालिक वो तेरा।
बुलाता तुझे कहके, मेरा तू मेरा।
उसी की शरण ले ले, हो जा नचीता।
जनम जाय बीता, पढों क्यों न गीता॥
बदलता है उसका ना, पकड़ो सहारा।
कभी न बदलता है, वो ही तुम्हारा।
वहीँ कृष्ण राधा, वहीँ राम सीता।
जनम जाय बीता, पढों क्यों न गीता।
जनम जाय बीता, पढों क्यों न गीता।
पढों क्यों न गीता, सुनो क्यों न गीता॥

Saturday, 24 September 2016

जय बजरंगी , जय हनुमान

लहर लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का।
बजरंगबली का झण्डा बजरंगबली का।
लहर लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का।।

इस झण्डे को हाथ में लेकर हाथ में लेकर रामा साथ में लेकर।
लंका जाय जलाई रे झण्डा बजरंगबली का।।
लहर लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का।।

इस झण्डे को हाथ में लेकर हाथ में लेकर रामा साथ में लेकर।
सीता की शुधि लाई रे झण्डा बजरंगबली का।।
लहर लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का।।

इस झण्डे को हाथ में लेकर हाथ में लेकर रामा साथ में लेकर।
संजीवन लेकर आई रे झण्डा बजरंगबली का।
लहर लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का।।

इस झण्डे को हाथ में लेकर हाथ में लेकर रामा साथ में लेकर।
लक्ष्मण के प्राण बचाये रे झण्डा बजरंगबली का।
लहर लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का।।

इस झण्डे को हाथ में लेकर हाथ में लेकर रामा साथ में लेकर।
सीता राम मियाये रे झण्डा बजरंगबली का।।
लहर लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का।।

इस झण्डे को हाथ में लेकर हाथ में लेकर रामा साथ में लेकर।
भूतों को मार भगाये रे झण्डा बजरंगबली का।।
लहर लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का।।

इस झण्डे को हाथ में लेकर हाथ में लेकर रामा साथ में लेकर।
भक्तों की लाज बचाई रे झण्डा बजरंगबली का।।
लहर लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का।।

इस झण्डे को हाथ में लेकर हाथ में लेकर रामा साथ में लेकर।
लंका जाय जलाई रे झण्डा बजरंगबली का।।
लहर लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का।।

सालासर शुभ धाम तुम्हारा है प्रशिद्ध जगत उजियारा।
मेहंदीपुर शुभ धाम तुम्हारा है प्रशिद्ध जगत उजियारा।
शंकट मिटाये रे झण्डा बजरंगबली का।
लहर लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का।।

जो कोई झण्डा प्रेम से गावे वास तुम्हारे चरणों में पावे।
भक्ति प्रेम बढ़ाये रे झण्डा बजरंगबली का।।
लहर लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का।।

लहर लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का।
बजरंगबली का झण्डा बजरंगबली का।
लहर लहर लहराये रे झण्डा बजरंगबली का।।


नाचत राधिका संग गिरधारी

नाचत राधिका संग गिरधारी
युगल छवि लगे अति ही प्यारी

कल कल करती कालिंदी के तट की
शोभा साजे सखी अति मनोहारी
नाचत राधिका संग गिरधारी
युगल छवि लगे अति ही प्यारी

नाचत मयूरा संग युगल वर
सखियाँ जाएँ इनपर बलिहारी
नाचत राधिका संग गिरधारी
युगल छवि लगे अति ही प्यारी

शोभा अतुलनीय बरण ना होवे
मुदित विराजें सखी पिय प्यारी
नाचत राधिका संग गिरधारी
युगल छवि लगे अति ही प्यारी

नित नित उमंग तरंग प्रेम को
झूम रहे संग ललित सुकुमारी
नाचत राधिका संग गिरधारी
युगल छवि लगे अति ही प्यारी

पायल की रुनझुन गूँजे चहुं और
अद्भुत छवि जावे ना बिसारी
नाचत राधिका संग गिरधारी
युगल छवि लगे अति ही प्यारी

Thursday, 22 September 2016

श्री राम - स्तुति

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं |
नवकंज-लोचन, कंज-मुख, कर-कंज, पद-कंजारुणं ||
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं |
कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनील-नीरद सुन्दरं |
पट पीत मानहु तडित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं ||
भजु दीनबंधु दिनेश दानव-दैत्य-वंश-निकंदनं |
रघुनंद आंनदकंद कोशलचंद दशरथ-नंदनं ||
सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभुषणं |
आजानु भुज शर चाप धर, संग्राम-जित-खरदूषणं ||
इति वदति तुलसीदास शंकर-शेष-मुनि-मन-रंजनं |
मम हृदय-कंज-निवास कुरु, कामादि खल दल गंजनं | |
मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुन्दर साँवरो |
करुना निधान सुजान सीलु सनेहू जानत रावरो ||
एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषीं अली |
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली ||
सोरठा:
जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि |
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ||
|| सियावर रामचंद्र की जय ||